Friday, July 16, 2010

वो पल...

वो पल,
जब पहली बार नज़रोँ की चिलमन टकराई थी,
दूर कहीँ मन्दिर मेँ किसी ने घण्टी बजाई थी।

वो पल,
जब दो दिल धक्-धक् धड़क रहे थे,
आसमान मेँ काले बादल कड़क रहे थे।

वो पल,
जब दिलो-दिमाग़ मेँ एक नशा छाया था,
एक-दूजे की आँखो मेँ प्यार उमड़ आया था।

वो पल,
जब भावनाऐँ प्रस्फुटित हो रही थी,
सारी दुनिया मानो सँकुचित हो रही थी।

वो पल,
जिन मेँ सारी ज़िन्दगी जी ली,
ज़माने भर की सारी खुशियाँ ले ली...

वो पल,
बीत तो गये पर जीवित हैँ,
आज भी यादोँ मेँ करीब हैँ...

15 comments:

  1. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

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  2. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार

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  3. mere blog par swagat hai..
    कहां से आया ये सॉरी...!
    my new post......

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  4. वाह वाह क्या बात है....बढ़िया

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  5. सुंदर अतिसुन्दर बधाई

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  6. धन्यवाद आप सभी का...

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  7. बहुत बढ़िया लिखा है.

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  8. वो पल,
    बीत तो गये पर जीवित हैँ,
    आज भी यादोँ मेँ करीब हैँ...
    और फिर जीवित रहना भी चाहिये वे पल .. यही तो जीवन है
    सुन्दर

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  9. वाह वाह क्या बात है...

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  10. बहुत खूबसूरत पल संजोये हैं....

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  11. जो पल आपकी यादों में जिन्दा है उन्हें
    संभालकर जरूर रखिए
    कई बार यादें ही जिन्दगी का सहारा बन जाती है
    आपकी रचना बहुत ही शानदार है.

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  12. मिताली, तुम्‍हें आशीष। बस ऐसा ही लिखती रहो।

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  13. सराहनाओँ के लिए मैँ आप सभी का दिल से धन्यवाद अदा करना चाहती हूँ... मैँने तो लेखन के संसार मेँ चलना शुरू ही किया है, इसलिए आप सभी के आशीष, मार्गदर्शन और सहयोग की हमेशा ज़रुरत महसूस होगी... आभार...

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  14. कुछ कहूँगा नहीं..........
    :-)

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